अमेरिकी वित्तपोषण से UNH के शोधकर्ताओं ने ठंड-सहिष्णु अंगूर की बेलों को खतरे में डालने वाले फ्यूजेरियम रोग का अध्ययन शुरू किया
यह परियोजना उत्तरी वाइन क्षेत्रों में रोगजनक का मानचित्रण करेगी, जहां बेलों के क्षय से उपज का नुकसान हो चुका है
शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
University of New Hampshire की संघीय वित्तपोषण प्राप्त शोध टीम अंगूर की बेलों के एक उभरते रोग का अध्ययन शुरू कर रही है। यह रोग Fusarium कवकों से जुड़ा है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह उत्तरी अमेरिका के अंगूर उत्पादक क्षेत्रों में ठंड-सहिष्णु बेलों को प्रभावित कर रहा है और पहले ही बेलों के क्षय तथा उपज में कमी से जुड़ा पाया गया है।
विश्वविद्यालय ने गुरुवार, 5 नवंबर को घोषणा की कि इस परियोजना को U.S. Department of Agriculture के National Institute of Food and Agriculture से सहायता मिली है। “Exploring Fusarium Trunk Decline, an Emerging Threat to Cold-Hardy Grapevines in the U.S.” शीर्षक वाली इस परियोजना का नेतृत्व Xiaochen Yuan, सहायक प्रोफेसर, और Suzanne Slack, सहायक शोध संकाय सदस्य कर रही हैं। दोनों UNH के Department of Agriculture, Nutrition, and Food Systems से जुड़ी हैं।
यह शोध अंगूर की बेलों के तना-रोग पर केंद्रित है, जो Fusarium वंश की प्रजातियों से जुड़ा है। Fusarium कवक कई फसलों के रोगजनक के रूप में पहले से जाने जाते हैं, लेकिन ठंड-सहिष्णु अंगूर की बेलों के क्षय में उनकी भूमिका को अब भी अच्छी तरह नहीं समझा गया है। शोधकर्ता यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि रोग पैदा करने वाली आबादियां कहां से आती हैं, वे अंगूर की बेलों में कैसे और कब प्रवेश करती हैं, और उनका इतनी जल्दी पता कैसे लगाया जा सकता है कि नुकसान बढ़ने से पहले उत्पादक कदम उठा सकें।
यह मुद्दा पादप रोग विज्ञान से आगे भी अहम है, क्योंकि ठंड-सहिष्णु अंगूर उत्तरी मिडवेस्ट, ग्रेट लेक्स और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में बढ़ते वाइन कारोबार का आधार हैं। विश्वविद्यालय के मुताबिक, इन अंगूरों से 400 मिलियन डॉलर का उद्योग संचालित होता है, जिसमें वाइन उत्पादन और कृषि-पर्यटन शामिल हैं। यदि रोग से उपज घटती है या अंगूर के बागों की सेहत बिगड़ती है, तो ठंडे राज्यों में वाइनरी और अंगूर उत्पादन से जुड़े अन्य कारोबारों पर दबाव बढ़ सकता है।
UNH ने बताया कि अंगूर के बागों के पिछले सर्वेक्षणों में क्षयग्रस्त बेलों से Fusarium प्रजातियां मिली थीं। इसके बाद किए गए रोगजनकता अध्ययनों से पता चला कि इनमें से कुछ आइसोलेट ठंड-सहिष्णु संकर अंगूरों और Vitis vinifera किस्मों—जिस प्रजाति में कई पारंपरिक वाइन अंगूर शामिल हैं—दोनों में रोग पैदा कर सकते हैं। विश्वविद्यालय ने कहा कि प्रभावित बागों में उपज का काफी नुकसान दर्ज किया गया है, जिससे रोग की जीवविज्ञान, प्रसार और प्रबंधन को समझने की जरूरत और बढ़ गई है।
नई परियोजना मिडवेस्ट, ग्रेट लेक्स और पूर्वोत्तर में पहले हुए शोध का विस्तार करेगी। UNH के अनुसार, टीम अंगूर की बेलों के तना-रोग से जुड़ी Fusarium आबादियों के भौगोलिक वितरण का मानचित्रण करने और उनकी आनुवंशिक विविधता का अध्ययन करने की योजना बना रही है। शोधकर्ता यह भी जांचेंगे कि अलग-अलग आबादियां किस हद तक रोग पैदा करती हैं, उनकी माइकोटॉक्सिन पैदा करने की क्षमता का आकलन करेंगे, निदान के तरीकों को बेहतर बनाएंगे और उन कारकों का अध्ययन करेंगे जो रोग के विकास और उसके प्रबंधन को प्रभावित कर सकते हैं।
Slack ने कहा कि एक अहम सवाल यह है कि यह समस्या वास्तव में कितनी आम है। विश्वविद्यालय की ओर से जारी टिप्पणियों में उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं के पास मिडवेस्ट के आंकड़े पहले से हैं और उन्होंने न्यू हैम्पशायर के उन अंगूर बागों से भी संपर्क किया है जिन्होंने इसी तरह की समस्याओं की सूचना दी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय नमूनों के भीतर Fusarium पाया गया है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि उत्पादकों को रोग का जल्द निदान करने की सख्त जरूरत है। Slack के मुताबिक, फिलहाल यह तय करने में लगभग दो महीने लग सकते हैं कि बेल में मौजूद Fusarium रोगजनक किस्म का है या नहीं, क्योंकि लकड़ी में पाई जाने वाली कुछ प्रजातियां रोग पैदा नहीं करतीं। उन्होंने कहा कि लक्ष्य यह पता लगाने का तेज तरीका विकसित करना है कि हानिकारक Fusarium मौजूद है या नहीं, ताकि उत्पादक जल्द प्रबंधन संबंधी फैसले ले सकें।
Yuan ने कहा कि इस परियोजना से रोग के पूरी तरह खत्म होने की उम्मीद नहीं है, बल्कि इसका मकसद उत्पादकों को इसे अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में मदद देना है। यह उन उत्तरी अंगूर उत्पादक क्षेत्रों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकता है, जहां ठंड-सहिष्णु किस्मों ने अंगूर के बागों और स्थानीय वाइन उत्पादन का विस्तार किया है। चूंकि यह रोग ठंड-सहिष्णु संकरों और Vitis vinifera, दोनों को प्रभावित करता दिखता है, इसलिए इसके निष्कर्ष उन बागों के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं जहां केवल संकर अंगूर उगाए जाते हैं।
विश्वविद्यालय ने इस शोध को न्यू हैम्पशायर में वाइन के व्यापक आर्थिक महत्व से जोड़ा। WineAmerica के 2025 Economic Impact Study का हवाला देते हुए UNH ने कहा कि राज्य का वाइन उद्योग हर साल वाइनरी से जुड़ी अनुमानित 154,500 यात्राओं को सहारा देता है और पर्यटन पर लगभग 29.5 मिलियन डॉलर का खर्च उत्पन्न करता है। अंगूर के बागों की उत्पादकता घटाने वाले किसी भी रोग का असर उत्पादकों से आगे तक पहुंच सकता है—जिसमें टेस्टिंग रूम, ग्रामीण पर्यटन संचालक और वाइन से आने वाले पर्यटकों पर निर्भर कारोबार शामिल हैं।
UNH ने कहा कि इस परियोजना में विश्वविद्यालय के शोधकर्ता, USDA Agricultural Research Service की Kristi Gdanetz MacCready, Extension विशेषज्ञ, निदान प्रयोगशालाएं और क्षेत्र के अंगूर उत्पादक साथ काम कर रहे हैं। विश्वविद्यालय के अनुसार, निष्कर्षों को Extension कार्यक्रमों, प्रकाशनों, निदान संसाधनों और क्षेत्रीय संपर्क गतिविधियों के माध्यम से उत्पादकों तथा उद्योग के अन्य पेशेवरों के साथ साझा किया जाएगा।
इस शोध का उद्देश्य उत्पादकों को रोग की शुरुआती पहचान और विज्ञान-आधारित प्रबंधन के लिए अधिक व्यावहारिक साधन देना है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब देश के ठंडे हिस्सों के अंगूर बाग एक ऐसे खतरे का सामना कर रहे हैं जिसे शोधकर्ता उभरता हुआ बताते हैं, लेकिन जिसकी प्रकृति अब भी स्पष्ट नहीं है।