01.06.2026

लद्दाख के शीर्ष प्रशासक ने एक नई आबकारी नीति को मंजूरी दी है, जिसके तहत हिमालयी क्षेत्र में शराब की बिक्री का दायरा बढ़ाया जाएगा, कुछ करों और लाइसेंसिंग बाधाओं में ढील दी जाएगी तथा अल्कोहल उत्पादों की ट्रैकिंग कड़ी की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि इसका मकसद नशे के दुरुपयोग पर अंकुश लगाना, पर्यटन को समर्थन देना और अवैध व्यापार कम करना है।
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना द्वारा मंजूर इस नीति के तहत अब रिटेल स्तर पर हार्ड लिकर, जिसमें Indian Made Foreign Liquor और विदेशी शराब शामिल हैं, की बिक्री की अनुमति होगी। अब तक इस केंद्र शासित प्रदेश में केवल बीयर, वाइन और रेडी-टू-ड्रिंक पेय ही खुदरा दुकानों के जरिए बेचे जा सकते थे। पहली बार गेस्ट हाउस और होमस्टे भी शराब लाइसेंस हासिल कर सकेंगे, जिससे होटल से बाहर भी पहुंच बढ़ेगी। माइक्रोब्रुअरी वाले बीयर बार भी अनुमति पाएंगे।
अधिकारियों ने कहा कि ये बदलाव लद्दाख में कानूनी शराब की उस कृत्रिम कमी को दूर करने के लिए हैं, जिसने पर्यटकों को हतोत्साहित किया और कुछ आगंतुकों को क्षेत्र से बाहर से शराब लाने के लिए प्रेरित किया। प्रशासन ने यह भी कहा कि यह नीति नागरिक समाज समूहों, धार्मिक संगठनों, चिकित्सा विशेषज्ञों और स्थानीय प्रतिनिधियों द्वारा नशीले पदार्थों तथा मनोदैहिक दवाओं पर बढ़ती निर्भरता को लेकर जताई गई चिंताओं के जवाब में लाई गई है।
नए नियम ई-नीलामी के जरिए 20 शराब वेंड खोलेंगे, जबकि पहले केवल दो आउटलेट ही संचालित थे। शराब की बिक्री लेह शहर से आगे बढ़कर नुब्रा, चांगथांग, शाम और ज़ांस्कर तक भी होगी। संशोधित ढांचे के तहत होटल परिसर के भीतर, यहां तक कि अतिथि कक्षों में भी, शराब का सेवन किया जा सकेगा। पहले यह सुविधा केवल बार तक सीमित थी।
प्रशासन ने लाइसेंसिंग प्रक्रिया भी सरल कर दी है। आबकारी लाइसेंस के लिए जरूरी दस्तावेजों की संख्या 16 से घटाकर छह कर दी गई है, और लाइसेंस जारी होने से पहले जिला प्रशासन की मंजूरी की अनिवार्यता हटा दी गई है। जिन होटलों के पास पहले से GST पंजीकरण है, उनके लिए शराब लाइसेंस लेने हेतु पर्यटन पंजीकरण अब अनिवार्य नहीं होगा। जिन होटलों के पास GST पंजीकरण नहीं है, उन्हें इसके बजाय FSSAI या पर्यटन पंजीकरण कराना होगा।
इस नीति में थोक और खुदरा दोनों स्तरों पर एक समान शुल्क संरचना लागू की गई है। सभी IMFL ब्रांडों पर आबकारी शुल्क 500 रुपये प्रति लीटर शुद्ध अल्कोहल तय किया गया है। थोक लाइसेंस का वार्षिक शुल्क 3.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है। खुदरा वेंड्स के लिए आधार मूल्य लेह नगर पालिका वार्डों में 60 लाख रुपये और अन्य क्षेत्रों में 30 लाख रुपये तय किया गया है। खुदरा विक्रेताओं का लाभ मार्जिन 12% से घटाकर 10% कर दिया गया है।
अब निर्माता थोक वितरण भी संभाल सकेंगे, जिसे अधिकारियों ने आपूर्ति श्रृंखला सुधारने और बाजार में अधिक ब्रांड उपलब्ध कराने वाला कदम बताया है। नीति निर्धारित शुल्क के भुगतान पर निजी आयोजनों, बैंक्वेट हॉल और पार्टी हॉल में शराब परोसने की भी अनुमति देती है।
प्रवर्तन को मजबूत करने के लिए निर्माताओं और आयातकों को शराब उत्पादों पर आबकारी विभाग द्वारा अनुमोदित सुरक्षा होलोग्राम लगाना होगा। अधिकतम खुदरा मूल्य से ऊपर बिक्री करते पकड़े गए विक्रेताओं का लाइसेंस और earnest money deposit जब्त हो सकता है। नीति प्लास्टिक बोतलों में शराब पर प्रतिबंध लगाती है और केवल अनुमोदित कांच की बोतलों, PET बोतलों तथा टिन कैनों में बिक्री की अनुमति देती है।
प्रशासन ने कहा कि केंद्रीय सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार खुदरा वेंड धार्मिक स्थलों, स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक पार्कों से कम से कम 100 मीटर दूर होने चाहिए। लाइसेंसधारी शराब कारोबार में 21 वर्ष से अधिक आयु के किसी भी व्यक्ति को नियुक्त कर सकते हैं।
अधिकारियों ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य एक अधिक विनियमित बाजार बनाना है, साथ ही ऐसे क्षेत्र में राजस्व संग्रह और उपभोक्ता पहुंच बेहतर करना है, जहां पर्यटन अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है।