इंडियन माल्ट व्हिस्की एसोसिएशन और Scotch Whisky Association ने सहयोग समझौते पर किए हस्ताक्षर

नई दिल्ली समझौता भारत के बढ़ते प्रीमियम व्हिस्की क्षेत्र के लिए मानकों, प्रामाणिकता, टिकाऊपन और कानूनी संरक्षण का ढाँचा तय करता है

गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026

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इंडियन माल्ट व्हिस्की एसोसिएशन और Scotch Whisky Association ने सहयोग समझौते पर किए हस्ताक्षर

इंडियन माल्ट व्हिस्की एसोसिएशन और Scotch Whisky Association ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को नई दिल्ली में सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए। दोनों संगठनों ने कहा कि इसका मकसद भारत के माल्ट व्हिस्की उत्पादकों और स्कॉटलैंड के स्कॉच व्हिस्की उद्योग के बीच संबंधों को और गहरा करना है।

हस्ताक्षर समारोह The Imperial Hotel में स्कॉटलैंड के प्रथम मंत्री John Swinney की मौजूदगी में हुआ। समझौते पर इंडियन माल्ट व्हिस्की एसोसिएशन के महानिदेशक मेजर जनरल Rajesh Chopra और Scotch Whisky Association के अंतरराष्ट्रीय निदेशक Ian Duddy ने हस्ताक्षर किए।

दोनों संगठनों के अनुसार, समझौते में सूचना, उद्योग संबंधी ज्ञान और तौर-तरीकों के आदान-प्रदान, टिकाऊपन और साझा हित के नियामकीय मुद्दों सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का ढाँचा तय किया गया है। संगठनों ने यह भी कहा कि वे उत्पादों की प्रामाणिकता, कानूनी संरक्षण, बौद्धिक संपदा के उल्लंघन और ज़िम्मेदार खपत को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने की योजना बना रहे हैं।

यह समझौता व्हिस्की के दो ऐसे क्षेत्रों को जोड़ता है जिनकी अलग पहचान और अलग कानूनी एवं व्यावसायिक परंपराएँ हैं। स्कॉच व्हिस्की स्कॉटलैंड के सबसे प्रसिद्ध निर्यात उत्पादों में से एक है और भौगोलिक उत्पत्ति तथा उत्पादन संबंधी नियमों के तहत संरक्षित है। वहीं, भारत में माल्ट व्हिस्की उत्पादक अपनी श्रेणी के लिए अधिक मान्यता और स्पष्ट मानकों की मांग कर रहे हैं, क्योंकि निर्यात बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में प्रीमियम स्पिरिट्स की मांग बढ़ रही है।

समारोह में जारी बयान में Chopra ने कहा कि यह समझौता भारत के माल्ट व्हिस्की उद्योग के विकास और स्थापित व्हिस्की उत्पादक क्षेत्रों के साथ उसके जुड़ाव की दिशा में एक अहम पड़ाव है। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी से दोनों पक्षों को विशेषज्ञता साझा करने, उत्पादों की प्रामाणिकता बेहतर बनाने और उद्योग की टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

संगठनों ने कहा कि यह हस्ताक्षर भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच बढ़ते आर्थिक जुड़ाव के दौर में हुआ है। उन्होंने India-UK Comprehensive Economic and Trade Agreement के लागू होने का उल्लेख किया, जिसे जारी बयान में मुक्त व्यापार समझौता भी कहा गया है। उनके अनुसार, व्यापक व्यापारिक संबंध उद्योग संगठनों के बीच संवाद के अधिक अवसर पैदा कर सकते हैं और कारोबारों को दोनों बाज़ारों में काम करने में मदद दे सकते हैं।

समझौते की कोई वित्तीय शर्तें घोषित नहीं की गईं और बयान में इससे सीधे जुड़ी किसी तात्कालिक व्यावसायिक परियोजना, संयुक्त निवेश या बाज़ार तक पहुँच संबंधी प्रतिबद्धता का ज़िक्र नहीं था। इसके बजाय, दस्तावेज़ साझा उद्योगगत चिंताओं—खासकर मानकों, प्रामाणिकता और कानूनी संरक्षण—पर लगातार सहयोग के लिए एक औपचारिक ढाँचा बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया लगता है।

भारतीय उत्पादकों के लिए ये मुद्दे अधिक अहम हो गए हैं, क्योंकि भारत में बनी प्रीमियम व्हिस्की को विदेशों में पहचान मिल रही है और डिस्टिलर इस बात की स्पष्ट परिभाषा की मांग कर रहे हैं कि भारतीय माल्ट व्हिस्की किसे कहा जा सकता है। भारत के उद्योग संगठनों का कहना है कि गलत प्रस्तुति पर लगाम लगाने, उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाने और निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए अधिक मजबूत मानकों और प्रमाणन प्रणालियों की ज़रूरत है।

इंडियन माल्ट व्हिस्की एसोसिएशन की स्थापना जुलाई 2024 में एक गैर-लाभकारी उद्योग संगठन के रूप में हुई थी। यह खुद को भारत के माल्ट व्हिस्की उत्पादकों के साझा मंच के रूप में बताता है। संगठन का कहना है कि उसके लक्ष्यों में इस श्रेणी की अखंडता की रक्षा करना, वैश्विक मानकों के अनुरूप गुणवत्ता मानकों को प्रोत्साहित करना और बिखरे हुए नियमन से जुड़े मुद्दों का समाधान शामिल है। एसोसिएशन का यह भी कहना है कि वह वकालत, प्रमाणन ढाँचों और बौद्धिक संपदा से जुड़े मुद्दों पर काम के ज़रिए भारतीय माल्ट व्हिस्की की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा मजबूत करना चाहता है।

समझौते में Scotch Whisky Association की भागीदारी इसे अहमियत देती है, क्योंकि स्कॉच के इर्द-गिर्द लंबे समय से स्थापित नियामकीय और कानूनी ढाँचा मौजूद है। दोनों पक्षों के बीच सहयोग लेबलिंग, प्रामाणिकता संबंधी दावों और संरक्षित शब्दों के दुरुपयोग से जुड़े विवादों में खास तौर पर प्रासंगिक हो सकता है। हालांकि, बयान में यह नहीं बताया गया कि दोनों संगठन विशिष्ट मामलों से कैसे निपटेंगे।

हस्ताक्षर समारोह में Swinney की मौजूदगी ने मुख्यतः उद्योग-स्तर के इस समझौते को राजनीतिक आयाम भी दिया। उनकी उपस्थिति ने भारतीय और स्कॉटिश कारोबारों के बीच करीबी संबंधों में व्यापक व्यापारिक और कूटनीतिक दिलचस्पी को रेखांकित किया। खाद्य और पेय क्षेत्र में यह खास तौर पर अहम है, जहां ब्रांडिंग, उत्पत्ति और निर्यात नियम बाज़ार मूल्य के प्रमुख आधार हैं।

यह समझौता अपने आप में कानूनों या व्यापार शुल्कों में बदलाव नहीं करता, लेकिन इससे संकेत मिलता है कि भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्हिस्की कारोबार के विस्तार के साथ दोनों एसोसिएशन अधिक व्यवस्थित संबंध बनाना चाहते हैं। इसका व्यावहारिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले महीनों में संगठन व्यापक प्रतिबद्धताओं से आगे बढ़कर मानकों, विवादों और बाज़ार की प्रथाओं पर नियमित समन्वय करते हैं या नहीं।

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