26.06.2026

केरल में कम-अल्कोहल पेयों के प्रस्तावित कर-उपचार को लेकर विवाद गुरुवार को तब और तेज हो गया, जब CPI(M) नेता और पूर्व आबकारी मंत्री एम.बी. राजेश ने मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन पर इस उपाय को लेकर “तथ्यात्मक रूप से गलत” बयान देने का आरोप लगाया और स्पष्टीकरण की मांग की।
पलक्कड़ में बोलते हुए राजेश ने कहा कि सतीशन का यह कहना गलत था कि यह प्रस्ताव पिछली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट सरकार में शुरू हुआ था, जब वर्तमान CPI(M) राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन के पास आबकारी विभाग था। राजेश ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा उद्धृत फाइल केवल कम-अल्कोहल पेयों की परिभाषा बदलने से संबंधित थी और उसमें कर घटाने की कोई योजना शामिल नहीं थी।
राजेश ने कहा कि केरल की 2022-23 शराब नीति में मादक पेयों को तीन श्रेणियों में बांटने का प्रस्ताव था: वाइन, शराब और कम-अल्कोहल उत्पाद। उन्होंने कहा कि यह नीति कैबिनेट की मंजूरी और नियमों में बदलाव के बाद लागू की गई, लेकिन पिछली LDF सरकार ने कभी कम-अल्कोहल पेयों पर कर घटाने का फैसला नहीं किया।
उन्होंने सतीशन से यह बयान वापस लेने को कहा कि पिछली LDF सरकार ने ऐसी कर कटौती की योजना बनाई थी, लेकिन विधानसभा चुनावों के कारण उसे लागू नहीं कर सकी। राजेश ने यह भी कहा कि पिछली सरकार ने 2023 में केवल बिना-अल्कोहल पेयों की बिक्री की अनुमति दी थी और कम-अल्कोहल उत्पादों के लिए कर रियायतों की दिशा में कोई और कदम नहीं उठाया था।
यह बहस पेय उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि कम-अल्कोहल पेयों पर आबकारी व्यवस्था में किसी भी बदलाव का असर खुदरा कीमतों, उत्पादक मार्जिन और वाइन, बीयर तथा स्पिरिट्स की सीमा पर आने वाले उत्पादों के केरल में कर-निर्धारण पर पड़ सकता है।
राजेश ने वर्तमान सरकार पर पर्याप्त पारदर्शिता के बिना प्रस्ताव को संभालने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि फाइल 21 मई को सतीशन तक पहुंची, 24 दिन तक उनके पास रही और 14 जून को मंजूर हुई। राजेश ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट सहयोगियों के भीतर भी कई नेताओं को इस प्रस्ताव की जानकारी नहीं थी, जब तक विपक्षी दलों ने मुद्दा नहीं उठाया।
कम-अल्कोहल पेयों पर कर घटाने का बजट प्रस्ताव पहले ही कई पक्षों से आलोचना झेल चुका है, जिनमें कुछ कांग्रेस नेता भी शामिल हैं। सतीशन कह चुके हैं कि इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला UDF लेगा।
राजेश ने उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में UDF के उन दावों को भी खारिज किया कि पिछली वाम सरकार ने केरल में बारों के बड़े विस्तार को संभव बनाया था। उन्होंने कहा कि ओommen चांडी के नेतृत्व वाली UDF सरकार के दौरान राज्य में 748 बार थे, इससे पहले कि बार रिश्वत कांड के दौरान आबकारी अधिनियम में संशोधनों के बाद 28 पांच-सितारा होटल बारों को छोड़कर बाकी सभी ने अपने लाइसेंस खो दिए।
राजेश के अनुसार, जब UDF 2016 में सत्ता से बाहर हुई, तब केरल में 813 बीयर और वाइन पार्लर तथा BEVCO के 306 शराब आउटलेट थे। उन्होंने कहा कि जिन होटलों के पास पहले से बीयर और वाइन पार्लर लाइसेंस थे और बाद में जिन्हें थ्री-स्टार दर्जा मिला, उन्हें LDF कार्यकाल में बार लाइसेंस दिए गए। उन्होंने कहा कि अब केरल में 896 बार होटल हैं।
राजेश ने Indian Made Foreign Liquor की बिक्री के आंकड़े भी दिए और कहा कि UDF शासन में 2012-13 में केरल की सबसे अधिक बिक्री दर्ज हुई थी, जो 344.33 लाख केस थी। उन्होंने कहा कि 2011-16 की UDF सरकार के दौरान IMFL की औसत वार्षिक बिक्री 341.264 लाख केस रही, जबकि 2016 से 2021 तक पहले LDF कार्यकाल में यह 322.182 लाख केस और दूसरी LDF सरकार में 315.26 लाख केस रही।
यह आदान-प्रदान केरल के बजट बहस में शराब नीति को लेकर एक राजनीतिक संघर्ष जोड़ता है, जहां अब कराधान और उत्पाद वर्गीकरण दोनों जांच के दायरे में हैं, क्योंकि दल इस बात पर बहस कर रहे हैं कि प्रस्तावित बदलाव की जिम्मेदारी किसकी है।