भारत के सुप्रीम कोर्ट ने टेट्रा पैक में बिकने वाली शराब पर उठाए सवाल

अदालत ने कहा कि यह पैकेजिंग उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकती है और नाबालिगों के लिए शराब पीना आसान बना सकती है.

22.05.2026

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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार और कई राज्य आबकारी विभागों से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें टेट्रा पैक और सैशे में बिकने वाली शराब पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। अदालत ने कहा कि यह पैकेजिंग उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकती है और नाबालिगों के लिए शराब पीना आसान बना सकती है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने Community Against Drunken Driving नामक गैर-लाभकारी संगठन की याचिका पर सुनवाई के बाद नोटिस जारी किए। संगठन शराब की पैकेजिंग के लिए देशभर में एक समान राष्ट्रीय नीति की मांग कर रहा है। कार्यवाही के अनुसार अदालत ने इस प्रारूप को “बहुत भ्रामक” बताया।

याचिका में दलील दी गई है कि कार्टन और सैशे में बिकने वाली शराब फलों के रस या अन्य गैर-मादक पेयों जैसी दिख सकती है, खासकर तब जब लेबल पर फल की तस्वीरें या chilli mango vodka जैसे फ्लेवर दिए हों। समूह का कहना है कि इनमें से कई उत्पादों पर तंबाकू उत्पादों की तरह स्पष्ट चेतावनी नहीं होती।

याचिका में अदालत से केंद्र सरकार को “bottling” की परिभाषा अधिक संकीर्ण करने का निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि इसे केवल कांच की बोतलों या ऐसे अन्य कंटेनरों तक सीमित किया जाए जो सामान्य पेय पैकेजिंग से स्पष्ट रूप से अलग पहचाने जा सकें। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होने वाले नियम भी मांगे गए हैं, ताकि पैकेजिंग मानकों को स्थानीय आबकारी प्राधिकरणों पर न छोड़ा जाए।

याचिका के अनुसार यह पैकेजिंग शराब को छिपाना, ले जाना और परिवहन करना आसान बनाती है, जिससे नाबालिगों द्वारा शराब पीने, वाहनों में शराब सेवन, राज्य सीमाओं के पार तस्करी और पर्यावरणीय नुकसान का जोखिम बढ़ता है। इसमें यह भी कहा गया है कि डिजाइन सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने और नशे में वाहन चलाने को बढ़ावा देता है, क्योंकि इन उत्पादों को सॉफ्ट ड्रिंक या जूस समझ लिया जा सकता है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए अधिवक्ता विपिन नैयर ने अदालत से कहा कि तंबाकू उत्पादों के विपरीत इन अल्कोहल पैक्स पर अक्सर मजबूत चेतावनी लेबल नहीं होते। उन्होंने कहा कि कुछ कार्टन फलों के रस के कंटेनरों जैसे दिखते हैं, जबकि उनमें वोडका होती है।

यह मुद्दा पहले भी न्यायिक ध्यान खींच चुका है। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने दो व्हिस्की ब्रांडों के बीच ट्रेडमार्क विवाद की सुनवाई के दौरान टेट्रा पैक में शराब की बढ़ती बिक्री पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि इसकी पैकेजिंग फलों के रस के कार्टन से काफी मिलती-जुलती है।

यह नई याचिका भारत के अल्कोहल उद्योग पर व्यापक असर डाल सकती है, अगर इससे पैकेजिंग के लिए राष्ट्रीय मानक तय होता है। इसका असर न केवल वोडका पर, बल्कि कार्टन या सैशे में बिकने वाली वाइन, बीयर और अन्य मादक पेयों पर भी पड़ सकता है, साथ ही लेबलिंग नियमों और उत्पादकों व वितरकों की अनुपालन लागत पर भी।

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