हाउस ऑफ कॉमन्स ने 331 के मुकाबले 181 मतों से शराब पर बढ़े उत्पाद शुल्क को मंजूरी दी
बजट प्रस्ताव के तहत 1 फरवरी 2027 से बीयर, वाइन और स्पिरिट्स पर कर बढ़ेंगे; ड्राफ्ट पेय की दरों और छोटे उत्पादकों की राहत में संशोधन होगा
बुधवार, 4 नवंबर 2026
वेस्टमिंस्टर में हाउस ऑफ कॉमन्स ने मंगलवार, 3 नवंबर को शराब पर उत्पाद शुल्क की नई दरों को मंजूरी दी। सदन ने बजट प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसके तहत 1 फरवरी 2027 से बीयर, वाइन और स्पिरिट्स पर कर बढ़ेंगे।
संसदीय रिकॉर्ड Hansard के अनुसार, यह प्रस्ताव 331 के मुकाबले 181 मतों से पारित हुआ। इसके तहत पेय पदार्थों की कई श्रेणियों पर शराब संबंधी उत्पाद शुल्क में बदलाव किया जाएगा। ड्राफ्ट पेय की दरों और छोटे उत्पादकों को मिलने वाली राहत में भी संशोधन होगा।
कॉमन्स के मतदान से नई दर-सूची आगामी वित्तीय वर्ष के लिए सरकार की व्यापक बजट योजना का हिस्सा बन गई है। संसदीय रिकॉर्ड के अनुसार, इन बदलावों का उद्देश्य महंगाई के अनुरूप शराब पर करों को अद्यतन करना और ऐसी निष्पक्ष कर व्यवस्था को समर्थन देना है, जिसे सांसदों ने बहस के दौरान मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुकूल बताया। स्रोत सामग्री में यह भी कहा गया है कि यह नीति सार्वजनिक वित्त और जन स्वास्थ्य से जुड़े व्यापक लक्ष्यों से जुड़ी है।
मंजूर किए गए बदलावों में शराब बाजार के प्रमुख हिस्से शामिल हैं। बीयर, वाइन और स्पिरिट्स सभी पर असर पड़ेगा। प्रस्ताव में ड्राफ्ट पेय भी शामिल हैं, जो पब और आतिथ्य क्षेत्र के अन्य कारोबारों के लिए अहम हैं। छोटे उत्पादकों को मिलने वाली राहत में बदलाव भी छोटे ब्रुअरी, वाइनरी, साइडर निर्माताओं और डिस्टिलरी के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे बड़ी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए कर संबंधी सहायता पर निर्भर रहते हैं।
इस फैसले पर पेय कंपनियों की करीबी नजर रहने की संभावना है, क्योंकि यूनाइटेड किंगडम घरेलू उत्पादकों और आयातकों, दोनों के लिए एक बड़ा बाजार है। उत्पाद शुल्क की ऊंची दरों से आपूर्ति श्रृंखला में कर लागत बढ़ सकती है। ऐसे में कारोबारों को फरवरी 2027 में नई दरें लागू होने से पहले कीमतों, मार्जिन और उत्पाद योजनाओं की समीक्षा करनी पड़ सकती है। दुकानों या बार में कीमतों पर कितना असर पड़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां बढ़ी हुई लागत का कितना हिस्सा उपभोक्ताओं पर डालने का फैसला करती हैं या डाल पाने में सक्षम होती हैं।
आयातकों के लिए समय महत्वपूर्ण है, क्योंकि शराब उत्पादों की खरीद और शिपिंग की प्रक्रिया अक्सर लंबी होती है। नई दरें लागू होने से काफी पहले उत्पादकों और वितरकों को अनुबंधों, प्रचार योजनाओं और स्टॉक संबंधी फैसलों में भी बदलाव करना पड़ सकता है। कई श्रेणियों में कारोबार करने वाली कंपनियों पर असर अलग-अलग हो सकता है, क्योंकि उत्पाद शुल्क में बदलाव का प्रभाव बीयर, वाइन और स्पिरिट्स पर हमेशा एक जैसा नहीं पड़ता।
ड्राफ्ट उत्पाद शुल्क में बदलाव पर पब कारोबार की खास नजर रहेगी। कर व्यवस्था से नल से परोसे जाने वाले पेय और खुदरा दुकानों के जरिए बिकने वाले पेय की कीमतों के बीच का अंतर प्रभावित हो सकता है। छोटे उत्पादकों को मिलने वाली राहत में संशोधन बड़े ब्रांडों से परे भी मायने रख सकता है, क्योंकि छोटे कारोबारों के पास अक्सर लागत वृद्धि को खुद वहन करने की गुंजाइश कम होती है और उसे उत्पादों की व्यापक शृंखला में बांटने के विकल्प भी कम होते हैं।
कॉमन्स में बहस के दौरान प्रस्ताव के समर्थकों ने कहा कि कर व्यवस्था में आर्थिक परिस्थितियों को प्रतिबिंबित होना चाहिए और सार्वजनिक सेवाओं को समर्थन मिलता रहना चाहिए। स्रोत सामग्री के अनुसार, प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सांसदों ने टिकाऊ राजकोषीय ढांचे को बनाए रखने के साथ-साथ शराब कराधान के ऐसे नजरिये को जारी रखने के महत्व पर जोर दिया, जिसे उन्होंने संतुलित और मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप बताया।
मतदान से यह भी जाहिर होता है कि बजट पैकेज के इस हिस्से के लिए सरकार को स्पष्ट बहुमत मिला। सदन में राजनीतिक बहस कराधान और सार्वजनिक नीति पर केंद्रित रही, लेकिन अब पेय क्षेत्र के लिए इसका व्यावसायिक असर प्रमुख मुद्दा बनेगा। उत्पादकों, आयातकों, थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं को यह समझना होगा कि संशोधित दरों का अलग-अलग उत्पादों पर क्या असर पड़ेगा—खासकर वहां, जहां मार्जिन पहले से कम हैं या प्रतिस्पर्धा के कारण कीमतें बढ़ाने की गुंजाइश सीमित है।
ब्रिटेन की शराब उत्पाद शुल्क व्यवस्था में उत्पादों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है और ड्राफ्ट पेय तथा छोटे उत्पादकों के लिए विशेष प्रावधान हैं। इसलिए कॉमन्स का एक ही मतदान बाजार के अलग-अलग हिस्सों पर अलग असर डाल सकता है। पबों को बीयर बेचने वाली ब्रुअरी, सुपरमार्केट को आपूर्ति करने वाला वाइन आयातक और निर्यात तथा घरेलू बाजारों में कारोबार करने वाला स्पिरिट्स उत्पादक—सभी पर एक ही नीतिगत बदलाव का असर अलग-अलग हो सकता है।
मंजूर किया गया प्रस्ताव अब सरकार की राजकोषीय योजनाओं से जुड़े व्यापक बजट ढांचे का हिस्सा है। शराब पर उत्पाद शुल्क की नई दरें 1 फरवरी 2027 से लागू होंगी।