Brown-Forman का लक्ष्य पांच साल में भारत को स्कॉच के शीर्ष 10 बाजारों में शामिल करना
स्पिरिट्स निर्माता सिंगल माल्ट पोर्टफोलियो का विस्तार कर रहा है; आयात शुल्क में कमी से भारत में प्रीमियम स्कॉच की संभावनाएं बेहतर हुई हैं
सोमवार, 26 अक्टूबर 2026

Brown-Forman ने कहा कि वह अगले पांच वर्षों में भारत को अपने स्कॉच व्हिस्की पोर्टफोलियो के शीर्ष 10 बाजारों में शामिल करना चाहता है। कंपनी ने यह नया व्यावसायिक लक्ष्य ऐसे देश के लिए तय किया है, जिसे वह प्रीमियम स्पिरिट्स में अपनी दीर्घकालीन वृद्धि के लिहाज से अहम मानती है।
इस लक्ष्य की जानकारी Brown-Forman के माल्ट और आयरिश व्हिस्की कारोबार के वैश्विक उपाध्यक्ष Adip Agarwal ने PTI को दिए एक साक्षात्कार में दी, जिसे Business Standard ने प्रकाशित किया। कंपनी ने यह नहीं बताया कि उसके स्कॉच बाजारों में भारत फिलहाल किस स्थान पर है। उसने बिक्री का लक्ष्य, मौजूदा बिक्री का आधार या सालाना पड़ावों की समय-सीमा भी नहीं दी। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि शीर्ष 10 का लक्ष्य बिक्री मूल्य, मात्रा या किसी अन्य आंतरिक मापदंड के आधार पर तय होगा।
इसके बावजूद, यह बयान Louisville, Kentucky स्थित स्पिरिट्स समूह की भारत में बड़ी रणनीतिक पहल का संकेत देता है। यहां कंपनी Jack Daniel’s के साथ अपनी लंबे समय से चली आ रही मौजूदगी से आगे बढ़ते हुए आयातित स्कॉच पर अधिक ध्यान दे रही है। Brown-Forman ने मई में अपने सिंगल माल्ट ब्रांड The GlenDronach के साथ भारतीय स्कॉच बाजार में कदम रखा और अब Benriach पेश करने की योजना है, जिसके बाद Glenglassaugh को भी बाजार में उतारा जाएगा।
Agarwal ने कहा कि भारत में कंपनी के लिए विकास की काफी गुंजाइश है, क्योंकि अधिक उपभोक्ता प्रीमियम उत्पादों की ओर बढ़ रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय व्हिस्की शैलियों में उनकी दिलचस्पी बढ़ रही है। उन्होंने PTI से कहा कि कंपनी का मानना है कि इस बाजार का आकार समय के साथ भारत को उसके स्कॉच पोर्टफोलियो के सबसे महत्वपूर्ण देशों में शामिल कर सकता है।
Brown-Forman दुनिया की प्रमुख स्पिरिट्स कंपनियों में से एक है। इसके व्यापक कारोबार में Jack Daniel’s और Woodford Reserve जैसे ब्रांड शामिल हैं। कंपनी ने 30 अप्रैल, 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में 3.928 अरब डॉलर की समेकित शुद्ध बिक्री दर्ज की। यह आंकड़ा Brown-Forman के दुनियाभर के कुल कारोबार का है, भारत में उसकी स्कॉच बिक्री का नहीं।
भारत में Brown-Forman की स्कॉच संबंधी महत्वाकांक्षाएं ऐसे समय सामने आई हैं, जब यह देश इस श्रेणी का एक बड़ा बाजार बना हुआ है। Scotch Whisky Association के अनुसार, 2025 में मात्रा के लिहाज से भारत दुनिया में स्कॉच का सबसे बड़ा निर्यात बाजार था; यहां 220 मिलियन से अधिक बोतलों के बराबर शिपमेंट भेजे गए। व्यापार संगठन ने यह भी कहा है कि पिछले दशक में भारत को स्कॉच का निर्यात मात्रा के लिहाज से 200% से अधिक बढ़ा है।
Brown-Forman के वैश्विक पोर्टफोलियो में उसका मौजूदा स्कॉच कारोबार अपेक्षाकृत नया है। कंपनी ने 2016 में The BenRiach Distillery Company का अधिग्रहण कर स्कॉच क्षेत्र में प्रवेश किया और इसके साथ The GlenDronach, Benriach और Glenglassaugh उसके ब्रांडों में शामिल हुए। भारत में इन ब्रांडों की शुरुआत, खासकर उन बाजारों में जहां उपभोक्ता अधिक प्रीमियम उत्पाद चुन रहे हैं, इन परिसंपत्तियों को बड़े अंतरराष्ट्रीय कारोबार में बदलने की दिशा में एक और कदम है।
Agarwal ने कहा कि Brown-Forman की भारत में व्यापक जन-बाजार वाले स्कॉच क्षेत्र में जल्दबाजी से उतरने की योजना नहीं है। इसके बजाय, कंपनी उच्च श्रेणी के उत्पादों, खासकर सिंगल माल्ट, पर ध्यान देती दिख रही है। उसे उम्मीद है कि प्रीमियम उत्पादों की ओर बढ़ता रुझान मांग को सहारा देगा। उन्होंने कहा कि भारतीय उपभोक्ता गुणवत्ता के लिए अधिक भुगतान करने को तेजी से तैयार हैं और शिल्प कौशल तथा उत्पादों के बीच के अंतर को बेहतर ढंग से पहचानते हैं।
इस रणनीति के तहत Brown-Forman बाजार के ऐसे हिस्से में उतर रही है जहां केवल मात्रा के बजाय कीमत, ब्रांड की स्थिति और उपभोक्ताओं को उत्पादों के बारे में जानकारी देना अधिक मायने रख सकता है। इसका मतलब यह भी है कि कंपनी एक प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में कदम रखेगी, जहां भारत में पहले से ही स्कॉच कारोबार स्थापित कर चुके बड़े अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मौजूद हैं।
कंपनी की इस पहल को नीतिगत बदलाव से भी मदद मिल सकती है। भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता 15 जुलाई, 2026 को लागू हुआ और इससे आयातित स्कॉच की कीमतों में बदलाव आने की उम्मीद है। समझौते के तहत आयात शुल्क 150% से घटाकर 75% किया जा रहा है और अगले दशक में इसे चरणबद्ध तरीके से घटाकर 40% तक लाया जाएगा।
इस बदलाव से भारत में स्कॉच बेचने वाले आपूर्तिकर्ताओं के लिए कारोबार की आर्थिक स्थिति पहले ही बेहतर हुई है। Business Standard के हवाले से आई खबरों के मुताबिक, शुल्क में कटौती के बाद Diageo और Pernod Ricard समेत प्रतिद्वंद्वी कंपनियों ने चार भारतीय राज्यों में कुछ ब्रांडों की कीमतें करीब 10%-15% घटाई हैं। शुल्क में कमी का मतलब यह नहीं है कि पूरे देश में कीमतें एकसमान घटेंगी, क्योंकि भारत में शराब बाजार का नियमन राज्य स्तर पर होता है। फिर भी इस समझौते को आयातित स्पिरिट्स के लिए एक अहम सकारात्मक कारक माना जा रहा है।
Brown-Forman के लिए व्यापार नीति में यह बदलाव प्रीमियम स्कॉच कारोबार खड़ा करना आसान बना सकता है और इसके लिए केवल संपन्न, सीमित उपभोक्ता वर्ग की मांग पर निर्भरता कम हो सकती है। कर का बोझ घटने से आयातित सिंगल माल्ट खरीदने के इच्छुक उपभोक्ताओं का दायरा बढ़ सकता है, खासकर उन शहरी केंद्रों में जहां प्रीमियम स्पिरिट्स की लोकप्रियता बढ़ रही है।
भारत में कंपनी की योजनाएं स्कॉच तक सीमित नहीं हैं। Agarwal ने कहा कि Brown-Forman अपने व्यापक पोर्टफोलियो का चरणबद्ध तरीके से विस्तार करना चाहती है और नए स्पिरिट्स तभी पेश करेगी, जब बाजार की स्थितियां और उपभोक्ता मांग इसकी गुंजाइश दें। स्कॉच के अलावा, कंपनी अपने आयरिश व्हिस्की उत्पाद भारत में लाना चाहती है। Agarwal ने कहा कि समय के साथ जिन और टकीला जैसी श्रेणियों में भी अवसर दिखते हैं।
यह भारत के प्रति Brown-Forman के दृष्टिकोण में व्यापक बदलाव का संकेत है। Jack Daniel’s कई वर्षों से यहां बिक रही है, लेकिन अब कंपनी केवल कुछ स्थापित ब्रांडों पर निर्भर रहने के बजाय कई श्रेणियों में इस बाजार को अधिक रणनीतिक महत्व देती दिख रही है। Agarwal ने कहा कि समूह धीरे-धीरे उत्पाद जोड़ेगा और हर ब्रांड को बाजार में उतारने के लिए वह सही समय चुनेगा।
Brown-Forman ने यह नहीं बताया है कि उसे भारत में अपने स्कॉच कारोबार से कितनी आय की उम्मीद है या शीर्ष 10 के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए वह कितना निवेश करेगी। कंपनी ने बाजार हिस्सेदारी के आंकड़े भी नहीं दिए और न ही बताया कि इस साल की शुरुआत में लॉन्च के बाद GlenDronach की बिक्री कितनी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
इसलिए यह घोषणा संख्यात्मक पूर्वानुमान के बजाय कंपनी की मंशा का बयान है। फिर भी संदेश स्पष्ट है: Brown-Forman भारत को प्रीमियम आयातित स्पिरिट्स के लिए प्राथमिकता वाला बाजार मानती है और अगले पांच वर्षों में इस प्रयास में स्कॉच की भूमिका बढ़ने की उम्मीद करती है।