06.05.2026

शोधकर्ता एक बार फिर रेड वाइन को ऐसे पेय के रूप में रेखांकित कर रहे हैं, जो सीमित मात्रा में सेवन करने पर कुछ स्वास्थ्य लाभ दे सकती है, हालांकि डॉक्टर लगातार चेतावनी देते हैं कि शराब कोई चिकित्सकीय उपचार नहीं है और इससे गंभीर जोखिम जुड़े हो सकते हैं।
The Guardian द्वारा उद्धृत एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्यम मात्रा में वाइन का सेवन हृदय-वाहिका कार्यक्षमता में सुधार, लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन यानी तथाकथित खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने और रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। वैज्ञानिक इन प्रभावों को वाइन में पाए जाने वाले ऐसे यौगिकों से जोड़ते हैं, जो सूजन कम करने, रक्त वाहिकाओं को फैलाने और रक्त प्रवाह सुधारने में सहायक हो सकते हैं।
रेड वाइन पर खास ध्यान इसलिए भी जाता है क्योंकि इसमें रेस्वेराट्रॉल होता है, जो अंगूर की छाल में पाया जाने वाला एक प्राकृतिक यौगिक है और लंबे समय से हृदय स्वास्थ्य से जुड़ा माना जाता रहा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यही एक वजह है कि आहार और हृदय रोग पर होने वाली चर्चाओं में रेड वाइन अक्सर अलग से सामने आती है।
ये निष्कर्ष ऐसे समय सामने आए हैं जब कई उपभोक्ता स्वास्थ्य-सचेत जीवनशैली के अनुरूप पेय विकल्प तलाश रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसे शराब पीने को वेलनेस रणनीति के रूप में समर्थन समझना गलत होगा। किसी भी संभावित लाभ की शर्त संयम है, और शराब से जुड़े जोखिम स्पष्ट बने हुए हैं।
रिपोर्ट में उद्धृत कुछ शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि तथाकथित चिकित्सीय स्तर महीने में लगभग 20 गिलास से अधिक नहीं होना चाहिए। फिर भी डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि शराब कुछ चिकित्सीय स्थितियों को बिगाड़ सकती है और विशेष रूप से उन लोगों के लिए खतरनाक हो सकती है जिनमें निर्भरता का इतिहास रहा हो या जिनमें इसकी आशंका अधिक हो।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि इस साक्ष्य का मतलब यह नहीं है कि जो लोग शराब नहीं पीते, उन्हें इसे शुरू कर देना चाहिए। जो लोग पहले से शराब का सेवन करते हैं, उनके लिए सलाह यही है कि मात्रा सीमित रखें और हृदय स्वास्थ्य के मुख्य कारक के रूप में समग्र आहार, व्यायाम और अन्य जीवनशैली कारकों पर ध्यान दें।
रेड वाइन में फिर से बढ़ती दिलचस्पी चिकित्सा जगत में उस व्यापक बहस को दर्शाती है कि क्या कुछ मादक पेय बिना नुकसान पहुंचाए संतुलित आहार का हिस्सा बन सकते हैं। फिलहाल शोधकर्ताओं का कहना है कि विज्ञान अभी भी सीमित सेवन से संभावित लाभों की ओर इशारा करता है, लेकिन इतना नहीं कि वाइन को अपने-आप में कोई सिफारिश माना जाए।