गर्मियों की तपिश से अंगूर छोटे हुए, जर्मनी में 2010 के बाद सबसे छोटी वाइन फसल की आशंका
उद्योग अधिकारियों के मुताबिक, 2026 की फसल 10 साल के औसत से 20% कम रह सकती है, हालांकि गुणवत्ता मजबूत दिख रही है।
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026

गर्म और शुष्क गर्मी के कारण कई उत्पादक क्षेत्रों में अंगूरों का आकार घटने के बाद, जर्मनी में 2026 की वाइन फसल हाल के वर्षों के सामान्य स्तर से कम रहने की आशंका है। हालांकि उत्पादकों और अधिकारियों का कहना है कि इस साल की फसल से उच्च गुणवत्ता वाली वाइन मिल सकती है।
जर्मन वाइन इंस्टीट्यूट (DWI) ने अपने शुरुआती अनुमान में कहा कि इस साल फसल की कुल मात्रा 8.7 मिलियन हेक्टोलिटर के 10 साल के औसत से करीब 20% कम रहने की संभावना है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो देश की फसल 2010 के बाद सबसे छोटी होगी, जब उत्पादन कुल 7.1 मिलियन हेक्टोलिटर था। पिछले साल की फसल 7.7 मिलियन हेक्टोलिटर रही थी।
यह आकलन ऐसे समय आया है जब इस मौसम में असामान्य रूप से जल्दी शुरू हुई अंगूर की कटाई जर्मनी में लगभग पूरी होने वाली है। गर्मियों की तपिश से अंगूर जल्दी पक गए और सूखे व गर्मी के कारण कई अंगूर सामान्य से छोटे रह गए। DWI के मुताबिक, इन छोटे अंगूरों में रस के तत्व भी अधिक सघन हुए, जिससे वाइन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
जर्मनी के संघीय सांख्यिकी कार्यालय, जिसे Destatis के नाम से जाना जाता है, ने भी कहा है कि 2026 की फसल औसत से कम रहेगी, हालांकि उसका अनुमान उद्योग संस्थान के आकलन से अधिक है। Destatis ने कहा कि उत्पादकों को 2020 से 2025 के औसत की तुलना में 4% कम फसल की उम्मीद थी। यह करीब 30 मिलियन लीटर की गिरावट के बराबर है और कुल उत्पादन लगभग 8.0 मिलियन हेक्टोलिटर रहने का अनुमान है। फिर भी यह 2025 में दर्ज 7.7 मिलियन हेक्टोलिटर से थोड़ा अधिक होगा।
दोनों आंकड़ों के बीच का अंतर बताता है कि ये अनुमान अभी अस्थायी हैं। Destatis ने कहा कि उसके आंकड़े 20 सितंबर तक किए गए सर्वेक्षण पर आधारित थे, जब अंगूर की कटाई पूरी नहीं हुई थी। DWI ने अपने आंकड़े को कटाई के अंत में जारी किया गया पहला पूर्वानुमान बताया। वाइन उत्पादकों, व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं और पेय कारोबार के अन्य व्यवसायों को जर्मन वाइन की खरीद, कीमतों और आने वाले महीनों में उपलब्धता की योजना बनाते समय इस अंतर को ध्यान में रखना होगा।
कम फसल के बावजूद, DWI और Destatis दोनों ने गुणवत्ता की संभावनाओं को अनुकूल बताया। DWI ने कहा कि जर्मनी के उत्पादकों को कुल मिलाकर अपेक्षाकृत कम मात्रा में फसल, लेकिन “बेहतरीन गुणवत्ता” की उम्मीद है। Destatis ने भी कहा कि 2026 में मौसम संबंधी घटनाओं से बड़े पैमाने पर नुकसान नहीं हुआ और अंगूरों से अच्छी फसल के संकेत मिल रहे हैं।
फसल में सफेद वाइन का हिस्सा अब भी काफी बड़ा है। Destatis के मुताबिक, करीब 70% फसल सफेद मस्ट और 30% लाल अंगूरों की है। अंगूर की किस्मों के लिहाज से Riesling और Dornfelder की मात्रा में मुख्य रूप से बढ़ोतरी की उम्मीद है, जबकि Green Silvaner और Blauer Portugieser की मात्रा घटने का अनुमान है।
जर्मनी के प्रमुख वाइन क्षेत्रों में हालात में काफी अंतर रहा। Destatis के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में Rheinhessen, Palatinate और Baden में बड़ी फसल दर्ज की गई। वहीं Mosel क्षेत्र और Franconia में उत्पादन घटने की आशंका है।
DWI के अनुसार, अलग-अलग क्षेत्रों के नतीजों में यह अंतर मुख्य रूप से बेलों की उम्र और अंगूर के बागों की मिट्टी की पानी रोकने की क्षमता के कारण रहा। संस्थान के प्रवक्ता Ernst Büscher ने कहा कि पुरानी बेलें हाल के वर्षों में जर्मनी के वाइन क्षेत्रों में बढ़ते सूखे के अनुरूप ढल गई हैं। उनकी गहरी जड़ प्रणाली के कारण वे इस साल के सूखे का आश्चर्यजनक रूप से अच्छी तरह सामना कर पाईं। इसके उलट, कम पानी रोकने वाली मिट्टी में लगे नए बागों पर पानी की कमी का स्पष्ट असर पड़ा और जहां संभव था, वहां सिंचाई करनी पड़ी।
फसल की खबर ऐसे समय आई है जब जर्मनी का वाइन बाजार पहले से ही कमजोर मांग का सामना कर रहा है। DWI ने कहा कि देश में वाइन की खपत घट रही है और 2025 में वाइन की बिक्री करीब 7% कम हुई। इस गिरावट का असर जर्मन और आयातित, दोनों तरह की वाइन पर पड़ा। संस्थान के अनुसार, वाइन खरीदने वाले परिवारों की संख्या में कमी नहीं आई, लेकिन उपभोक्ताओं ने वाइन कम बार और कम मात्रा में खरीदी।
कमजोर मांग से छोटी फसल का तत्काल बाजार पर पड़ने वाला असर कुछ हद तक कम हो सकता है, लेकिन इससे उत्पादकों की मुश्किलें भी बनी हुई हैं। जर्मन वाइन निर्माता एक साथ मौसम के कारण पैदावार पर दबाव, अंगूर के बागों को परिस्थितियों के अनुरूप ढालने की बढ़ती जरूरत और घरेलू बाजार में घटती खपत से जूझ रहे हैं। थोक विक्रेताओं से लेकर रेस्तरां के खरीदारों तक, पेय कारोबार के लिए संभावित सीमित आपूर्ति और क्षेत्रों के बीच उत्पादन में अंतर का असर जर्मन स्टिल और स्पार्कलिंग वाइन की अगली बिक्री अवधि में खरीद के फैसलों पर पड़ सकता है।
इस साल के बढ़वार मौसम ने जर्मन अंगूर की खेती में दिख रहे एक व्यापक रुझान को भी फिर उजागर किया है। गर्मी और सूखे का असर हर जगह एक जैसा नहीं रहा और अंगूर के बागों की मजबूती अब तेजी से स्थान की परिस्थितियों और बेलों की परिपक्वता से जुड़ी दिख रही है। कुछ क्षेत्रों में पुराने बाग बारिश की कमी का सामना कर पाए। वहीं, खासकर कम पानी रोकने वाली मिट्टी में, नई बेलों को मुश्किल हुई।
2026 की फसल का अंतिम आकार तब स्पष्ट होगा जब सभी अंगूरों का प्रसंस्करण पूरा हो जाएगा और उत्पादन के आधिकारिक आंकड़े तैयार होंगे। फिलहाल, उद्योग संस्थान और राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, दोनों के आकलन से व्यापक तस्वीर एक जैसी है: जर्मनी में औसत से छोटी वाइन फसल होने जा रही है। गर्मियों की तपिश के बाद अंगूरों का आकार घटा है और मुख्य अनिश्चितता यह है कि उत्पादन हाल के सामान्य स्तर से कितना नीचे रहेगा।