रेड वाइन की गिरावट से ऑस्ट्रेलिया की 2026 की अंगूर-पेराई में सफेद किस्में बहुमत में
Wine Australia के अनुसार, लाल अंगूरों का उत्पादन 29% घटा और राष्ट्रीय अंगूर-पेराई में सफेद किस्मों की हिस्सेदारी 53% रही।
गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026

वैश्विक बाजार में रेड वाइन की हिस्सेदारी घट रही है। ऑस्ट्रेलिया में यह बदलाव अब इस बात को प्रभावित कर रहा है कि उत्पादक कौन-से अंगूर काटते हैं और खरीदार उनके लिए कितना भुगतान करते हैं।
बुधवार को जारी Wine Australia के बाजार बुलेटिन के अनुसार, उद्योग निकाय द्वारा उद्धृत IWSR के आंकड़ों के आधार पर, वैश्विक खपत में रेड वाइन की हिस्सेदारी 2012 के लगभग 52% से घटकर 2025 में 43% रह गई—यानी नौ प्रतिशत अंक की कमी। इसी अवधि में व्हाइट वाइन की हिस्सेदारी 31% से बढ़कर 34% हुई, जबकि स्पार्कलिंग वाइन 8% से बढ़कर 13% पर पहुंच गई।
इस बदलाव का मतलब है कि इस अवधि में रेड वाइन की शुरुआती हिस्सेदारी में लगभग 17.3% की गिरावट आई, जबकि स्पार्कलिंग वाइन की हिस्सेदारी 62.5% बढ़ी। Wine Australia ने कहा कि ये आंकड़े अनुमानित हैं और दुनिया भर में वाइन की खपत का मासिक अपडेट नहीं, बल्कि पहले की समय-श्रृंखलाओं की दीर्घकालिक व्याख्या दर्शाते हैं।
बुलेटिन ने इस बदलाव को वैश्विक वाइन मांग में कमजोरी की अल्पकालिक प्रतिक्रिया के बजाय एक संरचनात्मक परिवर्तन बताया। इसके अनुसार, कई परिपक्व वाइन बाजारों में उपभोक्ता कुल मिलाकर कम वाइन पी रहे हैं, लेकिन रेड वाइन की खपत में गिरावट व्हाइट और स्पार्कलिंग शैलियों की तुलना में अधिक तेज रही है। Wine Australia ने बदलती जनसांख्यिकी, शराब के सेवन में संयम, बीयर, स्पिरिट, रेडी-टू-ड्रिंक उत्पादों और अल्कोहल-मुक्त विकल्पों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा, साथ ही पीने के मौकों की बदलती प्रकृति को इसके कारणों में गिनाया।
कई दशकों तक फ्रांस, इटली और स्पेन जैसे बड़े वाइन उत्पादक देशों में रेड वाइन का अहम स्थान रहा, जहां इसका रोजमर्रा के भोजन और लंबे समय से चली आ रही आदतों से गहरा जुड़ाव था। Wine Australia ने कहा कि यह चलन कमजोर पड़ा है, क्योंकि उपभोक्ता अब अधिक सहज और लचीले मौकों—जैसे बाहर की महफिलों, काम के बाद पेय और अनौपचारिक भोजन—की ओर बढ़ रहे हैं, जहां अक्सर हल्की शैलियां पसंद की जाती हैं।
बुलेटिन के अनुसार, व्हाइट वाइन ने बेहतर प्रदर्शन किया है, क्योंकि यह आज के पीने के अधिक विविध मौकों और खानपान के विकल्पों के अनुकूल है। इसमें यह भी कहा गया कि स्पार्कलिंग वाइन पारंपरिक समारोहों से आगे बढ़कर रोजमर्रा के मौकों पर भी अधिक आम पसंद बन गई है। Wine Australia ने Prosecco को इस बदलाव का स्पष्ट उदाहरण बताया और कहा कि इसने वाइन की अन्य श्रेणियों की हिस्सेदारी छीनने के बजाय वाइन पीने के नए मौके बनाने में मदद की है।
वैश्विक मांग में यह बदलाव अब उत्पादन के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। Wine Australia ने International Organisation of Vine and Wine के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में वैश्विक व्हाइट वाइन उत्पादन लगातार बढ़ा है और 2013 के आसपास रेड वाइन उत्पादन से आगे निकल गया।
ऑस्ट्रेलिया में 2026 के विंटेज में यही बदलाव और अधिक स्पष्ट रूप में नजर आया। Wine Australia के राष्ट्रीय विंटेज आंकड़ों के अनुसार, कुल वाइन-अंगूर पेराई अनुमानित 1.27 मिलियन टन रही—जो 2000 के बाद सबसे कम है। लाल अंगूरों का उत्पादन 29% गिरकर लगभग 596,000 टन रह गया, जबकि सफेद अंगूरों का उत्पादन 9% घटकर लगभग 669,000 टन हुआ। इससे राष्ट्रीय पेराई में सफेद किस्मों की हिस्सेदारी 53% हो गई। 2012 के बाद पहली बार कुल पेराई में सफेद अंगूर बहुमत में रहे।
ये आंकड़े संकेत देते हैं कि रेड वाइन की घटती मांग अब केवल खपत तक सीमित नहीं है। यह काटे जा रहे अंगूरों के मिश्रण, विभिन्न किस्मों के मूल्य और उत्पादकों तथा वाइनरी के निवेश संबंधी फैसलों को भी बदल रही है।
कीमतों में भी यही रुझान दिखा। Wine Australia के अनुसार, फसल छोटी होने के बावजूद 2026 में राष्ट्रीय भारित औसत खरीद मूल्य 6% गिरकर A $570 प्रति टन रह गया। यह गिरावट बताती है कि केवल उत्पादन कम होने से मांग की कमजोरी और बाजार के कुछ हिस्सों में आपूर्ति के भारी दबाव की भरपाई नहीं हो सकी।
ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख गर्म अंतर्देशीय क्षेत्रों में दबाव सबसे अधिक बना हुआ है। देश की वाणिज्यिक वाइन का बड़ा हिस्सा यहीं से आता है। बुलेटिन के अनुसार, Riverland, Murray Darling-Swan Hill और Riverina में औसत खरीद मूल्य 2025 के A $351 प्रति टन से घटकर 2026 में A $329 प्रति टन रहा, जो दीर्घकालिक औसत से लगभग 18% कम है।
इन गर्म क्षेत्रों में लाल और सफेद अंगूरों के बीच का अंतर खास तौर पर स्पष्ट रहा। 2026 में सफेद अंगूरों का औसत मूल्य A $350 प्रति टन था, जबकि लाल अंगूरों का A $290 प्रति टन। यानी सफेद अंगूरों का मूल्य लाल अंगूरों से A $60 प्रति टन, या लगभग 21%, अधिक रहा।
Wine Australia ने कहा कि गर्म क्षेत्रों के लाल अंगूर 2020 में A $650 प्रति टन से अधिक के शिखर के बाद से अब तक अपने मूल्य का 55% से अधिक गंवा चुके हैं। इसके उलट, गर्म क्षेत्रों के सफेद अंगूरों ने बेहतर मजबूती दिखाई है। उनका औसत मूल्य 2016 के A $285 प्रति टन से बढ़कर 2021 में A $400 प्रति टन से ऊपर पहुंचा, फिर घटकर 2026 में A $350 प्रति टन रह गया—जो गर्म क्षेत्रों के लाल अंगूरों के मूल्य से अब भी काफी अधिक है।
यह उलटफेर अहम है, क्योंकि ऑस्ट्रेलियाई वाइन की निर्यात पहचान लंबे समय से लाल किस्मों—खासकर Shiraz और Cabernet Sauvignon—के इर्द-गिर्द बनी है। Wine Australia ने कहा कि प्रीमियम ऑस्ट्रेलियाई रेड वाइन की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा अब भी मजबूत है, लेकिन उन वाणिज्यिक श्रेणियों पर दबाव बढ़ रहा है जो पहले व्यापक मांग और बिक्री की मात्रा पर निर्भर थीं।
बुलेटिन ने इस दबाव को ऑस्ट्रेलिया के ऐतिहासिक उत्पादन स्वरूप और वैश्विक बाजारों में अपेक्षाकृत अधिक टिकाऊ साबित हो रही शैलियों के बीच असंगति से जोड़ा। इसमें कहा गया कि चीन के बाजार के फिर खुलने से कुछ उत्पादकों के लिए निर्यात के नए अवसर बने हैं, लेकिन अतिरिक्त आपूर्ति और रेड वाइन की कमजोर मांग कीमतों पर दबाव डाल रही है—खासकर थोक और वाणिज्यिक वाइन उत्पादन से जुड़े लाल अंगूरों की कीमतों पर।
वहीं, कुछ सफेद किस्मों की स्थिति मजबूत है। Wine Australia ने कहा कि घरेलू मांग और बेहतर अंतरराष्ट्रीय पहचान के सहारे Chardonnay रणनीतिक रूप से अहम हो गई है। उसने Margaret River, Adelaide Hills, Yarra Valley और Tasmania सहित उन क्षेत्रों का उल्लेख किया, जिन्होंने प्रीमियम Chardonnay और अन्य ठंडी जलवायु वाली व्हाइट वाइन के लिए मजबूत प्रतिष्ठा बनाई है।
ठंडी जलवायु वाले क्षेत्रों में भी कीमतों का अंतर कम हुआ है। बुलेटिन के अनुसार, वहां लाल अंगूरों की कीमत 2020 में A $1,700 प्रति टन के शिखर पर पहुंची थी और फिर घटकर 2026 में लगभग A $1,440 प्रति टन रह गई। ठंडी जलवायु वाले सफेद अंगूरों का मूल्य 2016 में A $1,000 प्रति टन से कम था, जो 2026 में बढ़कर A $1,360 प्रति टन हो गया। अब दोनों के बीच का अंतर A $100 प्रति टन से कम है।
Wine Australia ने कहा कि ये बदलाव दिखाते हैं कि उद्योग केवल अस्थायी मंदी से नहीं, बल्कि व्यापक पुनर्संतुलन की प्रक्रिया से गुजर रहा है। उसके अनुसार, कई देशों के उत्पादक पहले ही अपने पोर्टफोलियो को व्हाइट और स्पार्कलिंग वाइन की ओर मोड़ रहे हैं और ऑस्ट्रेलिया में भी अंगूर-पेराई के मिश्रण तथा कीमतों में यही रुझान उभरने लगा है। बुलेटिन ने कहा कि उत्पादकों और वाइनरी के सामने अब मुख्य सवाल यह नहीं है कि रेड वाइन अहम बनी रहेगी या नहीं, बल्कि यह है कि बाजार का कितना हिस्सा अब भी बड़े पैमाने पर रेड वाइन की मांग के पुराने मॉडल पर निर्भर रह सकता है।