भारत के खाद्य नियामक का कहना है कि Diageo का Royal Challenge लेबल व्हिस्की खरीदारों को भ्रमित करता है।

एक गोपनीय नोटिस में कहा गया है कि ब्लेंड का बड़ा हिस्सा परिपक्व नहीं किया गया स्पिरिट है, जबकि फ्रंट-लेबल पर अमेरिकी ओक पीपों का दावा किया गया है।

मंगलवार, 11 अगस्त 2026

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भारत के खाद्य नियामक का कहना है कि Diageo का Royal Challenge लेबल व्हिस्की खरीदारों को भ्रमित करता है।

भारत के खाद्य सुरक्षा नियामक ने Diageo के देश में सबसे बड़े व्हिस्की ब्रांडों में से एक, Royal Challenge, पर उम्र बढ़ाने के एक अहम दावे को चुनौती दी है। नियामक का कहना है कि लेबल उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है, क्योंकि बोतल में मौजूद अधिकांश स्पिरिट को लकड़ी में परिपक्व नहीं किया गया था, Reuters द्वारा देखे गए एक गोपनीय सरकारी नोटिस के अनुसार।

20 जुलाई की तारीख वाला यह नोटिस भारत के खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण, या FSSAI, ने Diageo की भारतीय इकाई United Spirits को भेजा था। इसमें कहा गया है कि ब्रांड का यह कथन कि व्हिस्की “matured in American oak casks” है, उत्पाद पर अन्यत्र दी गई संरचना से मेल नहीं खाता, जहां demineralized water के बाद दूसरी सामग्री के रूप में grain neutral spirit सूचीबद्ध है।

नियामक के अनुसार, इससे फ्रंट-लेबल पर किया गया दावा भ्रामक हो जाता है। नोटिस में कहा गया है कि अल्कोहल का “major portion” गैर-परिपक्वित स्पिरिट है और पूरी अल्कोहल सामग्री लकड़ी के कास्कों में परिपक्व नहीं की गई है, जैसा कि लेबल संकेत देता है। इसमें यह भी कहा गया है कि मिश्रित स्पिरिट के लिए किसी भी आयु या maturation दावे को मिश्रण में इस्तेमाल किए गए सबसे युवा स्पिरिट के अनुरूप होना चाहिए, न कि सबसे पुराने घटक के अनुसार।

यह विवाद इस बात के केंद्र तक जाता है कि भारत में Royal Challenge को पीने वालों के सामने किस तरह पेश किया जाता है। Diageo का कहना है कि ब्रांड देश में सालाना 4.5 मिलियन नौ-लीटर केस से अधिक बेचता है, जो 40.5 मिलियन लीटर से ज्यादा के बराबर है। कंपनी इसे मिड-प्रेस्टिज प्राइस सेगमेंट का हिस्सा बताती है। उस आंकड़े के लिए उद्धृत स्रोत यह नहीं बताता कि बिक्री मात्रा किस वर्ष की है, और कोई तुलनीय पिछला आंकड़ा प्रकाशित नहीं हुआ है, जिससे संभावित वाणिज्यिक प्रभाव का सीधा आकलन किया जा सके।

यह मामला सिर्फ Royal Challenge के आकार की वजह से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसलिए भी कि जिस शब्दावली पर आपत्ति की गई है, वह सीधे मूल्य को संबोधित करती है। व्हिस्की में, कास्क maturation के संदर्भ अक्सर मूल्य निर्धारण और ब्रांड पोजिशनिंग, दोनों को समर्थन देते हैं। इस भाषा पर नियामकीय आपत्ति लेबलिंग मानकों, उपभोक्ता अपेक्षाओं और भारतीय स्पिरिट्स को राज्यों भर में जिस तरह बेचा जाता है, उससे जुड़े व्यापक प्रश्न खड़े कर सकती है।

FSSAI ने 20 जुलाई का नोटिस सार्वजनिक नहीं किया है। Reuters ने कहा कि उसने दस्तावेज़ की समीक्षा की है, लेकिन नियामक ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं बताया है कि ब्लेंड का कितना हिस्सा वह परिपक्व मानता है, कितना हिस्सा गैर-परिपक्व मानता है, या कितनी बोतलें या स्टॉक लॉट प्रभावित हो सकते हैं। प्राधिकरण ने maturation के मुद्दे पर Reuters के सवालों का भी जवाब नहीं दिया।

United Spirits ने कहा कि वह गुणवत्ता मानकों के प्रति प्रतिबद्ध है और लेबलिंग को लेकर नियामक के साथ बातचीत कर रही है। इस सप्ताह शेयर बाजारों को दिए एक बयान में कंपनी ने कहा कि उसे इस मामले से वित्तीय परिणामों की उम्मीद नहीं है और वह घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रही है।

Royal Challenge पर यह चेतावनी एक व्यापक नियामकीय कार्रवाई के साथ आई है, जिसका असर भारत के एक राज्य में पहले ही बिक्री पर पड़ चुका है। FSSAI ने इस महीने कहा कि उसने Madhya Pradesh में Royal Challenge और Antiquity Blue, जो दोनों Diageo से जुड़े हैं, तथा Bagpiper Deluxe Whisky और Old Cask Deluxe XXX Rum, जो Inbrew से जुड़े हैं, की बिक्री पर रोक लगा दी है। यह कार्रवाई उन आरोपों से जुड़ी थी कि कुछ उत्पादों में उचित aging और सामग्री पर निर्भर रहने के बजाय कृत्रिम फ्लेवरिंग, जिनमें व्हिस्की और रम फ्लेवरिंग पदार्थ शामिल हैं, का इस्तेमाल किया गया। क्षेत्र की कंपनियों ने कहा है कि वे भारतीय कानून का पालन करती हैं।

20 जुलाई का यह नोटिस नियामकीय आलोचना की एक दूसरी परत जोड़ता है। “matured in American oak casks” वाली भाषा पर सवाल उठाने के अलावा, नोटिस में कहा गया है कि लेबल पर “Scotch” शब्द का प्रयोग अस्पष्ट है और यह स्पष्ट रूप से नहीं बताता कि ब्लेंड में किस तरह का Scotch घटक इस्तेमाल किया गया है। एजेंसी ने कहा कि कंपनी को यह बताना चाहिए कि कौन-सा “Scotch” इस्तेमाल किया जा रहा है।

उत्पाद का लेबल ही नियामक के मामले का केंद्रीय बिंदु प्रतीत होता है। फ्रंट पर Royal Challenge को “a rich blend of Indian grain spirit & imported scotches, matured in American oak casks” के रूप में वर्णित किया गया है। पीछे के लेबल पर demineralized water, grain neutral spirit और Scotch सूचीबद्ध हैं, और कहा गया है कि उत्पाद में permitted natural color तथा added nature-identical whisky flavoring substances शामिल हैं।

यही अंतर नियामक की आपत्ति का कारण प्रतीत होता है। FSSAI की व्याख्या के अनुसार, सामग्री सूची से संकेत मिलता है कि बोतल में ऐसा ब्लेंड है जिसमें अल्कोहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ओक में परिपक्व नहीं किया गया है, जबकि फ्रंट लेबल बैरल में aging की अधिक व्यापक छवि देता है। नोटिस का तर्क है कि यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उपभोक्ता उत्पाद को जिस तरह समझता है, वह प्रभावित हो सकता है।

यह विवाद ऐसे समय सामने आ रहा है जब भारतीय अधिकारी खाद्य और पेय बाजार में लेबलिंग तथा संरचना संबंधी दावों की जांच तेज कर रहे हैं। Reuters ने कहा कि यह कार्रवाई शराब निर्माताओं, ऊर्जा पेय कंपनियों और खाद्य उत्पादकों तक पहुंच चुकी है, क्योंकि नियामक पैकेजिंग पर अधिक कड़े अनुपालन और अधिक सटीक विवरण की मांग कर रहे हैं। शराब उद्योग में यह दबाव लगभग $40 billion के बाजार में आ रहा है, जिसे राष्ट्रीय मानकों और राज्य-स्तरीय नियंत्रणों के मिश्रण से संचालित किया जाता है।

भारत का स्पिरिट्स बाजार भी असामान्य रूप से खंडित है, क्योंकि हर राज्य वितरण, मूल्य निर्धारण और खुदरा बिक्री पर अपने नियम तय करता है। इसका मतलब है कि देश के किसी एक हिस्से में नियामकीय चुनौती तात्कालिक प्रभाव में सीमित हो सकती है, लेकिन ब्रांडिंग और अनुपालन के लिहाज से उसका महत्व व्यापक हो सकता है। उदाहरण के लिए, Uttar Pradesh में Royal Challenge की 375-milliliter बोतल 360 रुपये में बिकती है, या Reuters द्वारा उद्धृत विनिमय दर पर लगभग $3.80 में। ऐसे मूल्य बिंदु यह समझाने में मदद करते हैं कि Royal Challenge जैसे वॉल्यूम ब्रांड बड़े उत्पादकों के लिए इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं।

फिलहाल सार्वजनिक रिकॉर्ड अधूरा है। FSSAI ने यह नहीं बताया है कि Royal Challenge में स्पिरिट का कौन-सा हिस्सा वास्तव में परिपक्व किया गया है, ऐसा वह कितना मानता है। उसने यह भी उजागर नहीं किया है कि क्या यह मुद्दा सभी उत्पादन पर लागू होता है या केवल कुछ विशिष्ट बैचों पर। उसने यह भी नहीं कहा है कि कंपनी से लेबल बदलने, ब्लेंड को पुनः तैयार करने, स्टॉक वापस लेने या कोई अन्य सुधारात्मक कदम उठाने को कहा जाएगा या नहीं। उसने अंतिम निर्णय के लिए कोई समय-सीमा भी जारी नहीं की है।

Diageo के लिए तात्कालिक काम संभवतः कानूनी या वित्तीय के बजाय नियामकीय होगा। United Spirits ने कहा है कि वह सक्रिय रूप से FSSAI के साथ संवाद कर रही है। यह प्रतिक्रिया संकेत देती है कि कंपनी इस मामले को स्पष्टीकरण या लेबल बदलावों के जरिए सुलझाने की कोशिश कर रही है, जबकि भारत में अपने सबसे अधिक बिक्री वाले ब्रांडों में से एक में बड़े व्यवधान से बचना चाहती है।

बाजार के लिए यह मुद्दा संभवतः करीबी निगरानी में रहेगा, क्योंकि यह स्पिरिट्स लेबलिंग में अक्सर दिखने वाले तनाव को छूता है: किसी उत्पाद की व्यापक मार्केटिंग कहानी और बोतल के भीतर मौजूद सटीक संरचना के बीच का अंतर। Royal Challenge के मामले में, यह तनाव अब देश की खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण के एक औपचारिक नोटिस में दर्ज है, जो उस ब्रांड को लक्षित करता है जो दुनिया के सबसे बड़े अल्कोहल बाजारों में से एक में सालाना 40.5 million liters से अधिक बेचता है।

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