ट्रंप के व्यापार विवाद से कनाडा में कुछ नापा वाइनरी की बिक्री शून्य पर

बढ़ती लागत और कनाडाई पर्यटकों की घटती संख्या नापा वैली पर दबाव बढ़ा रही है, जहां शराब पीने की आदतें भी बदल रही हैं

शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026

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नापा वैली की वाइनरी का कहना है कि कनाडा के साथ व्यापार विवाद और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों से निर्यात प्रभावित हो रहा है, लागत बढ़ रही है और क्षेत्र के सबसे अहम विदेशी पर्यटक समूहों में से एक की यात्राएं घट रही हैं। इससे उस उद्योग पर दबाव और बढ़ गया है, जो पहले से ही उपभोक्ताओं की बदलती पसंद से जूझ रहा है।

उत्तरी कैलिफोर्निया की नापा वैली में ये चिंताएं हर ओर महसूस की जा रही हैं, जहां वाइन उत्पादन और पर्यटन का गहरा संबंध है। वाइनरी मालिकों और पर्यटन अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र ने अपने कारोबार का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय मांग के आधार पर खड़ा किया था—विदेशी खरीदारों के साथ-साथ उन यात्रियों पर भी, जो वाइन चखने, होटलों में ठहरने और रेस्तरां तथा दुकानों में खर्च करने आते हैं। अब उनके मुताबिक, बाजार का यह हिस्सा कमजोर पड़ा है।

Grgich Hills Estate चलाने वाले इवो जेरमाज़ ने AFP से कहा, “टैरिफ से किसी को फायदा नहीं हो रहा है।” उन्होंने कहा कि व्यापारिक उपायों से उत्पादन लागत बढ़ी है और निर्यात को नुकसान पहुंचा है। उनके मुताबिक, उनकी वाइनरी पहले कनाडा में वाइन की 1,000 से अधिक पेटियां बेचती थी। उन्होंने कहा, “अब टैरिफ के बाद हमारी बिक्री शून्य है।”

इस दबाव का केंद्र कनाडा बन गया है। ओटावा और वॉशिंगटन के बीच गहरा व्यापार विवाद चल रहा है, जो तब और बढ़ गया जब ट्रंप ने बार-बार कनाडा का अपमान किया और कहा कि उसे अमेरिका का 51वां राज्य बन जाना चाहिए। जवाब में कनाडा के कुछ प्रांतों ने दुकानों की अलमारियों से अमेरिकी सामान हटा दिया है। इसी दौरान, कैलिफोर्निया आने की संभावना रखने वाले कुछ कनाडाई यात्रियों ने घर पर ही रहने का फैसला किया।

नापा वैली पर इसका असर एक साथ दो मोर्चों पर पड़ा है। वाइनरी निर्यात बाजार में बिक्री गंवा रही हैं और स्थानीय कारोबारों को कनाडाई पर्यटकों की घटती संख्या का भी सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के होटल उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाली Visit Napa Valley की अध्यक्ष लिंसे गैलाघर ने AFP से कहा कि सबसे बड़ा असर कनाडाई पर्यटकों की संख्या में गिरावट से हुआ है।

नापा के कुल पर्यटकों में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की हिस्सेदारी तेजी से घटी है। गैलाघर ने कहा कि पहले क्षेत्र में आने वाले करीब 20% पर्यटक विदेश से आते थे। अब यह आंकड़ा घटकर 8% रह गया है। कारोबारों ने घरेलू बाजार में अपने विपणन बजट का अधिक हिस्सा लगाकर इस कमी की भरपाई करने की कोशिश की है।

अब तक इस कोशिश से कुछ सहारा मिला है। पर्यटन अधिकारियों के हवाले से दिए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल नापा वैली में करीब 3.8 मिलियन पर्यटक आए, जो महामारी से पहले के स्तर से 3% अधिक थे। लेकिन गैलाघर ने कहा कि केवल आसपास के इलाकों और घरेलू यात्रियों से और कितने पर्यटक जुटाए जा सकते हैं, इसकी एक सीमा है। उनके मुताबिक, पूरी बहाली अंतरराष्ट्रीय कारोबार की वापसी पर निर्भर करती है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था के कामकाज को देखते हुए नापा में यह दबाव खास तौर पर अहम है। घाटी में 1,000 से अधिक अंगूर के बाग हैं और कई वाइनरी चखने के कक्षों में बिक्री, रेस्तरां और होटलों में आने वाले ग्राहकों तथा वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के जरिए होने वाले निर्यात—इन सभी पर निर्भर करती हैं। व्यापारिक बाधाएं बढ़ने और किसी बड़े विदेशी बाजार के पीछे हटने पर असर किसी एक उत्पादक की बिक्री तक सीमित नहीं रहता। इससे वितरण योजनाएं बाधित हो सकती हैं, मुनाफे का अंतर घट सकता है और पूरे वाइन कारोबार की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। इसका व्यापक पेय क्षेत्र पर भी असर पड़ता है, क्योंकि वाइन उत्पादक अक्सर बीयर और स्पिरिट ब्रांडों के साथ खुदरा बिक्री माध्यम, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और दुकानों की अलमारियों पर जगह के लिए प्रतिस्पर्धा साझा करते हैं।

नापा वैली लंबे समय से अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान पर निर्भर रही है। 1976 में “Judgment of Paris” के बाद इस क्षेत्र की प्रतिष्ठा तेजी से बढ़ी। इस ब्लाइंड टेस्टिंग में नापा की वाइन ने प्रमुख श्रेणियों में फ्रांस की अग्रणी वाइन को पीछे छोड़ दिया था। इस नतीजे ने खेती-किसानी वाले क्षेत्र को वैश्विक वाइन पर्यटन स्थल बनाने में मदद की।

जेरमाज़ का उस घटना से निजी रिश्ता है। उनके चाचा माइक ग्रिच ने 1973 Chateau Montelena Chardonnay बनाई थी, जिसने पेरिस की टेस्टिंग में सफेद वाइन की श्रेणी में शीर्ष सम्मान जीता। जेरमाज़ ने AFP को बताया कि उस आयोजन से पहले नापा का प्रचार बहुत कम था, लेकिन खबर फैलते ही यह तेजी से पर्यटन स्थल बन गया। संपन्न पर्यटक आने लगे, निवेश बढ़ा और घाटी का विस्तार हुआ।

उन्होंने कहा कि विकास का वह लंबा दौर अब ठंडा पड़ गया है। इसकी एकमात्र वजह टैरिफ विवाद नहीं है। वाइनरी को शराब पीने की आदतों में धीरे-धीरे हो रहे बदलाव का भी सामना करना पड़ रहा है, खास तौर पर युवा उपभोक्ताओं में, जो आम तौर पर पुरानी पीढ़ियों से कम शराब पीते हैं और खरीदारी करते समय अलग विकल्प चुनते हैं।

नापा के उत्पादकों का कहना है कि वे युवा ग्राहकों के सामने वाइन को पेश करने का तरीका बदलकर इस स्थिति के मुताबिक खुद को ढालने की कोशिश कर रहे हैं। Belong Wine Company ब्रांड की मालिक अली वैन ज़ाइल ने AFP से कहा कि युवा खरीदार अक्सर केवल ब्रांड के इतिहास से कम और वाइन उगाने तथा बनाने के तरीकों से अधिक प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि वे पर्यावरणीय तौर-तरीकों, खेती के तरीकों और कारोबार के सामाजिक मूल्यों की जानकारी चाहते हैं।

इसके चलते कुछ वाइनरी उत्पाद के पीछे की कहानी पर अधिक ध्यान दे रही हैं। केवल प्रतिष्ठा या परंपरा पर निर्भर रहने के बजाय वे वाइन को जमीन से जुड़ा कृषि उत्पाद बताती हैं, जिसकी उत्पादन प्रक्रिया के बारे में वे आगंतुकों को सीधे समझा सकती हैं। ऐसे क्षेत्र में, जहां चखने के कक्षों का अनुभव अब भी बिक्री का अहम आधार है, यह बदलाव युवा दर्शकों के लिए वाइनरी की यात्रा को अधिक व्यक्तिगत और प्रासंगिक बनाने की व्यापक कोशिश का भी हिस्सा है।

पर्यटन अधिकारी और कारोबारी नापा को केवल वाइन पर्यटन स्थल के रूप में पेश करने के बजाय इससे अधिक दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। व्यापक जीवनशैली के अनुभव में दिलचस्पी रखने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए वे घाटी के खान-पान, होटलों, बाहरी गतिविधियों और प्राकृतिक नजारों का प्रचार कर रहे हैं। इसमें नापा को केवल औपचारिक वाइन टेस्टिंग ही नहीं, बल्कि पैदल यात्राओं, खाना पकाने और धीमी रफ्तार वाले पर्यटन के ठिकाने के रूप में पेश करना भी शामिल है।

River Club tasting house में वैन ज़ाइल की साझेदार लॉरा गैब्रियल ने AFP से कहा कि क्षेत्र वाइन को सेहत के प्रति अधिक जागरूक और बाहरी गतिविधियों पर केंद्रित छवि से जोड़ना चाहता है। इस तरीके का मकसद ऐसे समय में नापा का आकर्षण बढ़ाना है, जब निर्यात बिक्री और विदेशी पर्यटन—दोनों दबाव में हैं।

फिलहाल घाटी में अब भी लाखों पर्यटक आ रहे हैं और यह अमेरिका के सबसे जाने-माने वाइन क्षेत्रों में से एक है। लेकिन वाइनरी मालिकों और पर्यटन अधिकारियों का कहना है कि व्यापार की बढ़ती लागत, कनाडा में बिक्री का नुकसान और अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की घटती संख्या यह उजागर कर रही है कि नापा का कारोबार स्थिर सीमापार संबंधों पर कितना निर्भर है।

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