26.05.2026
इतालवी वाइन उत्पादक 2025 में कमजोर बाजार के लिए तैयारी कर रहे हैं। कई कंपनियां निवेश का रुख कम-अल्कोहल वाली वाइनों, डिजिटल बिक्री और नए निर्यात बाजारों की ओर मोड़ रही हैं, ताकि देश और विदेश—दोनों जगह खपत में जारी गिरावट की भरपाई की जा सके।
Mediobanca की एक रिपोर्ट, जो 255 वाइनरीज़ के सर्वेक्षण पर आधारित है, में पाया गया कि 66% कंपनियों को उम्मीद है कि खपत आगे भी घटेगी। यह निष्कर्ष ऐसे सेक्टर की ओर इशारा करता है जिस पर बदलती पेय-आदतों, घरेलू खर्च पर बढ़ते दबाव और कई परिपक्व बाजारों में धीमी मांग का असर पड़ रहा है। इसके जवाब में वाइनरीज़ रिकवरी का इंतजार करने के बजाय अपने उत्पाद-समूह और व्यावसायिक रणनीतियों में बदलाव कर रही हैं, क्योंकि ऐसी वापसी में समय लग सकता है।
रिपोर्ट से पता चलता है कि विविधीकरण अब प्राथमिकता बन गया है। कई उत्पादक हल्की वाइनों और अल्कोहल-रहित विकल्पों में निवेश कर रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि वे उन उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहते हैं जो कम बार शराब पी रहे हैं या कम अल्कोहल वाले उत्पाद चुन रहे हैं। यह बदलाव पेय बाजार में व्यापक परिवर्तनों को दर्शाता है, जहां संयम और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं खरीद निर्णयों को प्रभावित कर रही हैं।
डिजिटल चैनलों की ओर भी अधिक पूंजी जा रही है। वाइनरीज़ ऑनलाइन बिक्री, सीधे उपभोक्ता तक पहुंचने वाले प्लेटफॉर्म और ऐसे मार्केटिंग टूल्स में ज्यादा संसाधन लगा रही हैं, जो उन्हें केवल पारंपरिक वितरकों पर निर्भर हुए बिना खरीदारों तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं। कई उत्पादकों, खासकर छोटे उत्पादकों के लिए, प्रत्यक्ष बिक्री बेहतर मार्जिन और ग्राहक संबंधों पर अधिक नियंत्रण देती है, ऐसे समय में जब बिक्री मात्रा पर दबाव है।
उभरते बाजारों में विस्तार एक और प्रमुख रणनीति है। यूरोप के कुछ हिस्सों और अन्य स्थापित बाजारों में मांग नरम पड़ने के साथ इतालवी वाइनरीज़ उन देशों पर अधिक ध्यान दे रही हैं जहां वाइन की खपत अभी भी बढ़ रही है या जहां प्रीमियम आयात के विस्तार की गुंजाइश है। लक्ष्य घरेलू बिक्री और उन बाजारों पर निर्भरता कम करना है जो अब पहले से ज्यादा अप्रत्याशित हो गए हैं।
रिपोर्ट का संकेत है कि उद्योग केवल संकुचन नहीं, बल्कि समायोजन के चरण में प्रवेश कर रहा है। निवेश संबंधी फैसले अब राजस्व बचाने, उत्पादों को ढालने और नए खरीदार खोजने की जरूरत से तय हो रहे हैं। इतालवी वाइनरीज़ के लिए अब चुनौती सिर्फ वाइन बनाना नहीं, बल्कि अपने उत्पादों को इस तरह ढालना भी है कि वे उपभोक्ताओं की खरीदने और पीने की बदलती पसंद से मेल खा सकें।